जन्म कुंडली के दशम भाव में सूर्य का शुभ/अशुभ फल
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शुभ सूर्य👉 दशम स्थान में सूर्य मीन, मेष, सिंह, कन्या एवं वृश्चिक राशि मे होकार यदि मंगल, गुरु, बुध आदि शुभ ग्रहों से युत या दृष्ट हो तो ऐसे जातक उच्चशिक्षित, समाज मे प्रतिष्ठित, कुशल व्यवसायी एवं अपने कार्य क्षेत्र में सफल रहते है।
इनको राजनीतिक एवं सरकारी क्षेत्र से सफलता प्राप्त होती है अथवा उच्च-प्रशासनिक अधिकारी बन सकते है। जातक भूमि, वाहन, मकान, संतान आदि सुखों से युत होता है।
जातक के पिता सुप्रतिष्ठित एवं साधन संपन्न होते है।
ये जातक विदेशी कार्यो से भी लाभान्वित होते है।
वृष, सिंह, कन्या एवं मीन लग्न के जातको को दशम सूर्य से मिश्रित फल मिलता है।
अशुभ सूर्य👉 दशम भाव मे नीच (तुला), शत्रु (कुम्भादी) राशिगत सूर्य हो अथवा शनि, राहु आदि पाप ग्रहों से युत या दृष्ट हो तो सूर्य की दशा में जातक के पिता को शारीरिक कष्ट या सुख में कमी अथवा जातक से वैचारिक मतभेद होते है।
जातक को नौकरी अथवा व्यावसायिक कार्य में बार-बार विघ्न-बाधाएं उत्पन्न होती है।
पदोन्नति में अड़चन आने का भय, धन हानि तथा सरकारी क्षेत्रो से परेशानी का सामना करना पड़ता है।
सेहत में कुछ ना कुछ कमी बनी रहती है।
जातक के संबंधी भी परायो सा व्यवहार करते है। राजनीतिक क्षेत्र में असफलता मिलती है।
शांति हेतु योग्य ब्राह्मण से जप और हवन कराएं, तथा शास्त्रोक्त विधि से दान और रत्न धारण करे। उपाय और शास्त्रोक्त विधि को जानने के लिए संपर्क करें।