याज्ञसेनी

                        याज्ञसेनी नाम था उसका। महर्षि धौम्य ने जन्म के बाद उसको अवभृत स्नान कराया था। यह जन्म सामान्य बात न थी। अग्निजा थी वह। अरणियों से प्रज्ज्वलित धूमरहित वह्नि शिखाओं को पिया था उसने। माता का दूध क्या होता है, उसे न पता था और न ही वह यह जानने...

भारतीय गणित का इतिहास~ एक सिंहावलोकन-

                  भारतीय गणित का इतिहास~ एक सिंहावलोकन- सभी प्राचीन सभ्यताओं में गणित विद्या की पहली अभिव्यक्ति गणना प्रणाली के रूप में प्रगट होती है। अति प्रारंभिक समाजों में संख्याये रेखाओं के समूह द्वारा प्रदर्शित की जाती थी। यद्यपि बाद में विभिन्न संख्याओं को...

गणेश विसर्जन :- ( गोबर के गणेश )

                        गणेश विसर्जन :- ( गोबर के गणेश ) यह यथार्थ है कि जितने लोग भी गणेश विसर्जन करते हैं उन्हें यह बिल्कुल पता नहीं होगा कि यह गणेश विसर्जन क्यों किया जाता है और इसका क्या लाभ है ?? हमारे देश में हिंदुओं की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि देखा देखी में...

शिव के पंचमुख स्वरूप- एकरहस्य~

        शिव के पंचमुख स्वरूप- एकरहस्य~ जगत के कल्याण की कामना से भगवान सदाशिव के विभिन्न कल्पों में अनेक अवतार हुए जिनमें उनके सद्योजात, वामदेव, तत्पुरुष, अघोर और ईशान अवतार प्रमुख हैं । ये ही भगवान शिव की पांच विशिष्ट मूर्तियां हैं । भगवान शिव का विष्णुजी से अनन्य...

कालिय नाग

                    कालिय नाग कालिय नाग कद्रू का पुत्र और पन्नग जाति का नागराज था। वह पहले रमण द्वीप में निवास करता था, किंतु पक्षीराज गरुड़ से शत्रुता हो जाने के कारण वह यमुना नदी में कुण्ड में आकर रहने लगा था। यमुनाजी का यह कुण्ड गरुड़ के लिए अगम्य था, क्योंकि इसी...

ब्रह्मकमल

                        ब्रह्मकमल ……. ब्रह्म कमल अर्थात ब्रह्मा का कमल, यह फूल मां नन्दा का प्रिय पुष्प है, इसलिए इसे नन्दाष्टमी के समय में तोड़ा जाता है और इसके तोड़ने के भी सख्त नियम होते हैं।कहा जाता है कि ज्यादातर फूल सूर्यास्त के बाद नहीं खिलते, पर...