जन्म कुंडली के दशम भाव में सूर्य का शुभ/अशुभ फल

                                          जन्म कुंडली के दशम भाव में सूर्य का शुभ/अशुभ फल ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ शुभ सूर्य दशम स्थान में सूर्य मीन, मेष, सिंह, कन्या एवं वृश्चिक राशि मे होकार यदि मंगल, गुरु, बुध आदि शुभ ग्रहों से युत या दृष्ट हो तो ऐसे जातक...

ज्योतिष और रोग, सिंह लग्न में रोगों के संभावित योग

                  ज्योतिष और रोग ~~~~~~~~~~~~ सिंह लग्न में रोगों के संभावित योग ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ आज हम सिंह लग्न में होने वाले संभावित रोगों की व्याख्या करेंगे। सिंह लग्न और रोग ~~~~~~~~~~~~~~ (1) सिंह लग्न में सूर्य सातवें हो तो मनुष्य को नेत्र रोग होता है। (2)...

जानिए क्या है योग

                                              (What is Yoga?) योग का स्वरूप- योग शब्द वेदों, उपनिषदों, गीता एवं पुराणों आदि में अति पुरातन काल से व्यवहृत होता आया है। भारतीय दर्शन में योग एक अति महत्त्वपूर्ण शब्द है। आत्मदर्शन एवं समाधि से लेकर कर्मक्षेत्र...

चन्द्रमा का प्रभाव, महत्त्व, फल तथा उपाय

                            चन्द्रमा का प्रभाव, महत्त्व, फल तथा उपाय ऋग्वेद में कहा गया है कि ‘चन्द्रमा मनसो जातश्चक्षोः सूर्यो अजायत:।‘ अर्थात चंद्रमा जातक के मन का स्वामी होता है। मन का स्वा मी होने के कारण यदि जन्म कुंडली में चंद्रमा की स्थिति ठीक न हो या वह...

रत्न चिकित्सा एक वैज्ञानिकी चेतना

                  आभार हिंद भास्कर का संपादकीय में स्थान देने पर रत्न चिकित्सा ~ एक वैज्ञानिकी चेतना रत्न चिकित्सा ~ एक वैज्ञानिकी चेतना संसार भर में पाये जाने वाले समस्त रत्न अपने में भिन्न भिन्न रंग लिए होते हैं या यूँ कहें कि सभी रत्न भिन्न रंग के होते हैं।...

याज्ञसेनी

                        याज्ञसेनी नाम था उसका। महर्षि धौम्य ने जन्म के बाद उसको अवभृत स्नान कराया था। यह जन्म सामान्य बात न थी। अग्निजा थी वह। अरणियों से प्रज्ज्वलित धूमरहित वह्नि शिखाओं को पिया था उसने। माता का दूध क्या होता है, उसे न पता था और न ही वह यह जानने...

जन्म कुण्डली में पितृ दोष

                                            मुख्य रूप से जन्म कुण्डली से ही पितृ दोष का निर्णय किया जाता है परंतु स्वप्न में पितृ के दर्शन होना,घर मे किसी के मृत्यु के बाद उनका अहसास होना भी एक प्रकार से पितृदोष ही है । सूर्य आत्मा एव पिता का कारक ग्रह है,पिता का...

शिशु त्रिपताकीरिष्ट : परिचय भाग

                                      शिशु त्रिपताकीरिष्ट : परिचय भाग किसी नवजातक के लिए जन्मपत्री प्रस्तुति के बाद, इसके माध्यम से “शिशुरिष्ट” मालूम करने में ”गण्ड रिष्ट’ से अलग पाराशरीय ‘वाराधिपति’, ‘यामार्द्धपति’ और...

केतुग्रह~ समग्रचिन्तन –

                              केतुग्रह~ समग्रचिन्तन – ज्योतिष शास्त्र के अनुसार केतु एक छाया ग्रह है जो स्वभाव से पाप ग्रह भी है। केतु के बुरे प्रभाव से व्यक्ति को जीवन में कई बड़े संकटों का सामना करना पड़ता है। हालांकि यही केतु जब शुभ होता है तो व्यक्ति को...

माँ मदालसा: महर्षि कश्यप पुत्र गंधर्वराज विश्वावसु पुत्री

                                    माँ #मदालसा: महर्षि #कश्यप पुत्र गंधर्वराज #विश्वावसु पुत्री.. ऋषियों ने भारतभूमि को आदिकाल से अपनी तपस्या द्वारा पुण्यभूमि बनाया है। यहां अनेक प्रकार के विद्वान ऋषि तथा विदुषियां हुई हैं, जिनके अच्छे कार्यों के लिए उन्हें सदैव...